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बुढ़ापा

सूरज ढलने लगा, शाम होने को आई
अब किरणों में वो चमक कहां, चारो ओर एक घना अंधेरा छाने को अाई
सूरज के चेहरे में वो दमक कहां, अब तो शाम होने को अाई
एक समय था जब किरणों में संजीवनी ताकत थी,
अब ये किरणे अंधेरे के भवर में लुप्त होने लगी
एक समय था जब सूरज दिखाता था रास्ता,
अब तो उसकी किरणे अंधेरे में खुद ही भटक गई
अब तो न जाने वो वक्त कब अा जाए,
जब सूरज शांति के शहर में चला जाए
सूरज ढलने लगा, शाम होने को आई।
©sharda