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बुंदे छलकती है ✍

आंखों से बुंदे छलकती है
जाने कहाँ गिर जाती है॥
छोटी - छोटी मोटी - मोटी
मोतीयों की धारा बह जाती है
कभी गम में तो कभी खुशीयों
में जाने कहाँ से आ जाती है
आंखों से बुंदे छलकती है,
जाने कहाँ गिर जाती है॥
छुपाने से ना छिपती है, रोकने
से ना रुकती है,खोले पल - पल
रहस्य कुछ सच्चे तो कुछ झूठे
आंखों से बुंदे छलकती है
जाने कहाँ गिर जाती है॥ 👁
©banirai