V

बूँद-बूँद से मिलकर

बूँद-बूँद से मिलकर

बूँद-बूँद से मिलकर, सागर की पहचान बनती है,

कदम पर कदम बढ़ने से, मंज़िल आसान बनती है।

खुद. पर यक़ीन रखना, राहें खुद-ब-खुद दिशा दे देंगी,

दिल में उमंग हो तो, ठोकर भी उड़ान बनतीं है।

क्या हुआ रात गहरी हो? वो सितारों मुस्कान बनती है,

थोड़ी और मेहनत करने से, किस्मत मेहरबान बनती है।

हौसले बुलंद रखना, तेरी हर एक राह आसान होगी,

क्यूँकी मेहनत की तपिश से, खुद की पहचान बनती हैं।

© विशाल सैनी