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बयान-ए-हकिकत

आज के बाद मैं गुमनाम हो जाऊंगा

तेरे शहर में रहा तो बदनाम हो जाऊंगा

मैं नाकामीयों को अपने किसी पे थोपना नहीं चाहता

मगर बाद मेरे जान-ए-जां तेरे सर पे इलज़ाम हो जाऊंगा

तहेदिल से तुझे चाहा मगर अपना बना न सका

मालूम न था इस तरह मैं नाकाम हो जाऊंगा

मेरे ख्यालों को समझो और हाँ कह दो वरना

आशिकों में शिकस्त-ए-इश्क का पैगाम हो जाऊंगा

अब्र पलकों पे आ बैठा इजाज़त मांग रहा है

सब्र की बांध टूटी तो अश्कों से तमाम हो जाऊंगा

न कोई दर्द रूला पाता है न कोई खुशी हंसा पाता है

रफ़्ता रफ़्ता अब मैं ग़मों का इमाम हो जाऊंगा

मुझे अपने दिल के किसी कोने में रख लो

बुरे वक्त में कुछ पल का इंतजाम हो जाऊंगा।©anuragrahi