N Nilesh Ingole en July 23, 2025 चाहत गुंजती थी जो बरसों से कानों में मेरी,दिल से उसे सुनना चाहता हुँ,आगज हैं कोई, या हैं कोई फरेब,और एकबार आजमाना चाहता हुँ। - निलेश इंगोले©nilesh2016