A anusingh en July 23, 2025 चाहती हूं जो शब्दों की मार्मिक नगरी में ,विचरण करना चाहती हूं।धूल बनकर उन झूठी कलाकृतियों ,को मिटा देना चाहती हूं।विकराल रूप को सहज बनाना चाहती हूं।©anusingh