A

चाहती हूं जो

शब्दों की मार्मिक नगरी में ,
विचरण करना चाहती हूं।
धूल बनकर उन झूठी कलाकृतियों ,
को मिटा देना चाहती हूं।
विकराल रूप को सहज बनाना चाहती हूं।
©anusingh