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चांद🌙

तारे तो बहुत है, फिर भी
ये आंखे चांद को ही क्यों
खोजती है , वह बादलों में
छिप भी जाये तो भी ये आंखें
उसे ही क्यों नीहारती है,
सुंदर तो तारे भी हैं, फिर भी
चांद की सूंदरता क्यों सब से
प्यारी लगतीं है..
तारे तो बहुत है..
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