चांद के बिना तो ये आसमान
भी अधूरासा लगता है,ये राते
भी तो चाँद का इंतजार करती है,
पर ये तारे छोटी- छोटी खुशी
ले कर आते है,
आसमान ज्यादा खुश तो नहीं
होता, पर हां वह उदास भी
नहीं होता,क्योंकि उसे अपने
चांद पर विश्वास होता है, वह
चांद की मजबुरी को समझता
है, की वह रोज नहीं
आ सकता, पर हां वह
ये भी जानता है, की वह
आता जरूर है.. .
चांद के बिना तो ये आसमान भी
अधुरासा लगता है॥
©banirai
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