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चांद सा चेहरा

ये चाँद तुम्हारी तरह क्यूँ दीखता है,
क्या ऐसा चेहरा और कही मिलता है।
खोया हूँ मैं तुममें, फिर ये ख्वाब क्यूँ दीखता है।
तुमसे कितने सवाल करने हैं, और जवाब मुझे मिलता है।
आज सुबह से ही देखने की तमन्ना थी तुमको,
और फिर मुझे चाँद ही दीखता है ।
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©vikasgarg