चाय का कप और तू
तेरे संग बातें… और तेरे हाथ में चाय का कप हो,
तू बोलता रहे इतना… कि लफ़्ज़ों को भी कभी चुप होना ज़रूरी लगे।
फिर एक घूंट भर कर तू यूँ खामोश सा हो जाए,
और मैं बस तुझे देखूं… जैसे ये लम्हा कभी खत्म ना हो।
तुझे देखती रहूं… घूंट भरते हुए,
चुस्कियां लेते हुए… आँखों से पीते हुए।
हर एक सिप को तेरे हलक से उतरते हुए महसूस करूं,
और तेरी सांसों से निकलता वो गरम धुआँ… मुझे छू कर गुज़र जाए।
तेरी बोलती हुई आँखें… तेरी मीठी चाय में डूबे हुए होंठ,
और तेरे हाथ में पकड़ा हुआ वो कप…
जैसे पकड़ा हो किसी शायरा ने अपने हाथ में कलम,
और लिखने को हो कोई बेहद खूबसूरत सा ख़्वाब… सिर्फ़ तेरा।
और जब वो ख़्वाब लिख दिया जाए…
तो तेरे सामने बैठकर, तुझे देखते हुए… तुझे घूंट भरते हुए,
तुझे वो ख़्वाब सुनाया जाए।
और तू… अपनी आँखों से मुझे यूँ देखता रह जाए,
जैसे बिना कहे ही सब समझ गया हो…
क्या है मेरे दिल में, सिर्फ़ तेरे लिए।
Ink&Emotions
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