ये जीवन प्यारे अनमोल बहुत
जीने में सुबह और शाम कहां
कभी दो पल मिल जाए खुद के लिए
चैन नहीं आराम कहां....1
कुछ सोंचू.. बदल जाता परिदृश्य
कुछ करने को चलूं हो जाता है अदृश्य
फिरता मारा रहता हरदम
दिखता है कोई वाम कहां
चैन नहीं आराम कहां.......2
जो भाए मन को मिल न सका
जो सपनों में नहीं था वो मिल गया
झंझावातों में उलझा रहा
तूफानों से हरदम हीं लडा
सोयी है जिंदगी बेलगाम कहां
चैन नहीं आराम कहां..........3
ये जीवन रब की है अमानत
है उसका ईशारा उसकी कयामत
भीड में खडा वजूद पाने के लिए
वो इंसा है आवाम कहां
चैन नहीं आराम कहां.............4
©abhidilse
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