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" छात्र की अभिलाषा "😀😀😀

काश वो स्कूल की घंटी सुनायी दे,
जिसका हम पुरे प्यार से इंतजार करते थे।
स्कूल के आँगन में खेलते वकत,
हमें कलास में बुलाती थी।
अरुचि वाले तास में भी,
सदा साथ देती थी।
कभी- कभी अच्छे शिक्षक से,
बजकर हमें जूदा कर देती थी।
"संकेत " छूटने के वकत मित्र की,
बढिया याद दिलाती थी।
काश वो स्कूल की घंटी सुनायी दे........
डाँ. माला चुडासमा "संकेत "🙏
©dr.mala