Y your_rohit en July 23, 2025 chillana jaroori hai..... चराग़ कोई अंधरों में जलाना ज़रूरी है , कोई सैलाब समंदर में उठाना ज़रूरी है । खामोशी से यहाँ हासिल नहीं कुछ भी , बहरों का शहर है , चिल्लाना ज़रूरी है ।©rohittiwar