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chillana jaroori hai.....

चराग़ कोई अंधरों में जलाना ज़रूरी है ,
कोई सैलाब समंदर में उठाना ज़रूरी है ।
खामोशी से यहाँ हासिल नहीं कुछ भी ,
बहरों का शहर है , चिल्लाना ज़रूरी है ।
©rohittiwar