V

छोटी छोटी बूंदे

मिल जाती है छोटी छोटी बूंदे,
और सागर बन जाता है,
बालू के छोटे छोटे कण मिले,
तो सुंदर घर बन जाता है,
छोटा सा होता है इक पल,
पल में जीवन खो जाता है,
पल में पल मिल जब जाता है,
इक युग का सर्जन हो जाता है,
छोटी छोटी भूलों से,
विकास पथ दूर हो जाता है,
छोटी छोटी भूलों से ही,
इक दिन सिर नीचा हो जाता है,
छोटे छोटे गुण खिल जाते,
गुणों का बगीचा खिल जाता है,
छोटे छोटे कामों से इक दिन,
साधारण मानव भी ईश्वर बन जाता है
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©vikasgarg