चलो एक काम करते हैं,
छांव में उम्मीद का बीज बोते है।
दर को बादल में छिपाते हैं,
हताशा को हम दीपक की किरण से भगाते हैं।
चलो बिछड़े हुए को मिलाते है,
प्यार का एक दरिया खोजते हैं।
सवेरे को मुस्कान देते हैं,
रात को सुकून देते हैं ।
चलो कुछ अपने लिए जीते हैं,
थोड़ा सा वक्त अपनो को देते हैं।
दुश्मनी का दाग मिटाते हैं,
दोस्ती का हाथ बढ़ाते हैं।
चलो साथ मिलकर चलते हैं,
कोई ऐसा आशियाना बनाऐ,
जहा सिर्फ अमन की चांदनी हो।
कोई धर्म की राह न हो,
इन्सानियत की जीत हो
©urvi13
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