V vikasgarg en July 23, 2025 चंडी चीरहरण का तांडव अब भीचुप बैठे हैं पांडव अब भीनारी अब भी दहशत में हैखेल रहे हैं कौरव अब भीहे केशव! नारी को ही अब चंडी बनकर आने दोखिलने दो ख़ुशबू पहचानो, कलियों को मुसकाने दो🌹🌹🌹©vikasgarg