बाड़ बाड़ मे हैं चोर मोरीयां!
कि मुख्यद्वार दिखाई देते हैं।
विकार वो!हरना था जिनको,
अब सँसकार दिखाई देते हैं!
बाड़ बाड़---------- पानी धोया करता था,पर! उल्टे आसार दिखाई देते हैं।
दोहन हैं कर बैठे कि पानी के, अन्तिम सँसकार दिखाई देते हैं।
बाड़ बाड़----------
कभी कबार सिनेमा जाते थे,पर।
सिनेमाघर-परिवार दिखाई देते हैं!
जल-थल हो ली है अब चन्दा की,
ऐसी तैसी के आसार दिखाई देते हैं।
बाड़ बाड़---------
घर घर मे मै प्रलय होती देख रहा हूँ।
तर्क-कुतर्क को आसार दिखाई देते हैं!
घर-समाज-परिवार पहले होते थे जैसे!
अब अन्धे को भी बाज़ार दिखाई देते हैं।
विकार वो जो हरना था जिनको!
अब तो सँसकार दिखाई देते हैं!
बाड़ बाड़ मे हैं युँ चोर मोरीयां!
कि मुख्य द्वार दिखाई देते हैं।
©ramvir
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