चटक रहे रिश्ते ,
खनक रहे सिक्के ,
मर चुकी अब एहसास ,
पालने मे झूल रही ,
अब तो महत्त्वकांक्षा भी हजार ,
चटक रहे रिश्ते ,
शोर ही शोर हर तरफ ,
बोझ भी अनगिनत बेसुमार ,
कौन है जो शामिल नहीं ,
कौन है जो बोझ तले दबा नहीं ,
फिर ऐ हताशा क्यों मेरे यार ,
चटक रहे रिश्ते ,
तूं बांधता चल गठरी ,
हो ना निराश ,
कूच कर देख ले ,
शमशान कब्रिस्तान ,
लकड़ियों के गठर तले ,
दबा जल रहा इंसान ,
मिट्टी के ढेर तले दबा ,
मिट्टी ही बन रहा इंसान ,
चटक रहे रिश्ते ,
ले चटकारे ,
ऐ तो है चटपटे कुरकुरे ,
कोस ना अपने आपको यार ,
जिंदगी है जी ले ,
जो मिले पी लें ,
छोड़ ना पैमाना का साथ ,
चटक रहे रिश्ते ,
जहर अमृत दोनों ,
प्रकृति की अनमोल धरोहर ,
कर इसका आवश्य ही रसपान ,
कड़वा मीठा तो स्वाद है ,
तूं स्वाद में खोए ,
काहे अपना जीवन मेरे यार ,
चटक रहे रिश्ते ,
खनक रहे सिक्के ।🤔
धन्यवाद 🙏
_____संजय निराला ✍
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