वक़्त वक़्त की ये दास्तान है
हृदय में जैसे भाव जागते है
तो ईश्वर नजदीक से हमें ताकते है
पल पल हमारे भीतर को जाँचते है
कि हमारे नैन कैसे दुनिया में झाँकते है
हम कैसे अपने भावों को साधते है
किन विचारों से हम कर्म को तलाशते है
और जिह्वा पर हमारे शब्द कैसे विराजते है
ईश्वर सब जानते हैं हमारे भीतर के रोम रोम को छांनते है
वो हमारे हर आयाम को पहचानते है
छुपा क्या सकते है हम उनसे वही तो है जो हृदय को दुल्हारते है।।
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