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डर किस बातका

दो का अंग है सब के पास,
पर नही है खुद पर विश्वाश,
कही ठोकर खाके न गिरू,
डर है हम लोगो के पास।।
TV मे जब उसको देखता हुँ करीब,
चकित रहा जाता हु मै कभी,
दौ के अंग नही है उसके पास ,
पर भी हाँस हाँस कर मेहनत करता है,
खुशी के साथ ।।
केहता है जब तक दम है मेहनत करुंगा,
विकलांग होने का मुझे क्या दुःख,
मेहनत और परिश्रम दोनों है मेरे पास,
इसमे ही रहुँगा सुख ।।
अत्मविश्वास का सिमा ही नही
खुश रहने का उसका स्वभाव,
इतना महेनत करता है वो,
की मेहनत का फल,
विकलांगा औलंपिक मे आ जाता वही,
और घृणा करने वाले जाते परेशान ।।
जग जाऊ ए देश निवासिलो
विकलांग लोगोने तो कर दिखाई गा,
घृणा करने वाले को दिनमे तारे दिखाई गा वो,
सिर्फ मेहनत और परिश्रम की बात है
जगजाऊ देशकै निवासियो, जग जाऊ देश के निवासियो।।
विकलांग लोग कर दिखाया,
पर अब भी कुछ कम नही ,
मेहनत और परिश्रम का ताकत देखो,
विकलांग लोग सै उदाहरण लो।।
©abishek