डर मरने की भला क्यों किया जाए
डर है कर्ज इस सर से उस सर न चला जाए
जोख़िम मैंने उठाएं योजनाएं मेरी रही
नुकसान में शरीक फिर औरों को क्यूं किया जाए
एक गरीब की चाहत फकत यह रहती है कि
कर्ज उतर जाए तो अमर हो जाया जाए
मेरे मेहनत का फ़ल यहां नहीं उसके पास है
हम क़िस्मत मिलें कोई तो लेने चल चला जाए
मैं उसके मिज़ाज से अच्छी तरह से वाकिफ हूं
वो मुझे ऐसे कुछ देगा नहीं चलो अब छिन लिया जाए।