काली लहरों के बीच कुछ सिलसिले हुए,
काले बादलों से घिरे हुए,
खुद को डुबो दिया तुमने
जरा भी नहीं सोचा गुमनाम को,
जिसके नाम की अंगूठी पहन डुबो रहे खुद को।
क्या कोई रास्ता नहीं था बचने का?
क्या कोई पास में नहीं था जो तुम्हे रोक लेता?
क्या कोई नाव लेकर नहीं आया बचाने तुम्हे?
यूं ही अकेले डूब गए बिना कोई आवाज़ दिए
क्या तुम्हे इश्क़ था उस सैलाब के पानी से!
©anusingh
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