S

देखा चाँद को रात तो फिर रो दिए ।

देखा चाँद को रात तो फिर रो दिए
आई चांदनी सुरत याद तो फिर रो दिए।
था जौक-ए-गम दिल में मगर मरहम के वास्ते
सोंचा तेरे विसाल को तो फिर रो दिए।
लिल्लाह मेरे जज्बात को समझा करे कोई
अपने खस्ता इस हालात पर फिर रो दिए।
रिश्ता-ए-दिल तेरे जमाने में है निभाना मुश्किल
देखा जब रूखसत-ए-यार तो फिर रो दिए।
परवाह नहीं अब हमें किसी गुब्बार-ए-आह की
निकला गुब्बार-ए-दिल ज्यों सो फिर रो दिए।
उड़ता हुआ गुब्बार सर-ए-राह देखकर
अंजाम अनुराग ने इश्क का सोंचा तो फिर रो दिए।
©anuragrahi