देखा जब गुलों को लेते अंगराई
मुहब्बत कसम तू बहुत याद आई।
इस हसीं वादियों में फुलों का खिलना
जैसे तेरे चेहरे पर हो जुल्फों का बिखड़ना
कि लागे जैसे मिलन की रूत हो आई
मुहब्बत कसम तू बहुत याद आई।
फिजा के मिजाज कुछ बदलने लगें हैं
कोंपले बहार बनके निकलने लगें हैं
सब्ज दश्त में कु कु सदा कोयल की आई
मुहब्बत कसम तू बहुत याद आई।
जवां हम हुए मगर जवानी नहीं है
तेरे बिना आलम रूहानी नहीं है
गैरत है हम कि आफ़त ये आई
मुहब्बत कसम तू बहुत याद आई।
जफा-ओ-सितम अब सब सह लुंगा
तेरे लिए बदल खुद को मैं दुंगा
तेरे रूखसती बाद दिमाग ठिकाने पर आई
मुहब्बत कसम तू बहुत याद आई
देखा जब गुलों को लेते अंगराई
मुहब्बत कसम तू बहुत याद आई।
©anuragrahi
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