S

देखो सुहानी मस्तानी रूत पावन आए रे।

देखो सुहानी मस्तानी रूत पावन आए रे
मोहे भिंगाने अपने रंग में सावन आए रे।
गरजे है बादल और चमकें है बिजली
काली घटाओं की आस्मां लगाई है कजली
मोहे बुलाने पिया मोर आंगन आए रे
मोहे भिंगाने अपने रंग में सावन आए रे।
हरा भरा है तरह तरह तरू से उपवन
शांत चित्त से तकता है मोरा नयन
दिल गुदगुदाने बेला लुभावन आए रे
मोहे भिंगाने अपने रंग में सावन आए रे।
खेतों में हर्षित टर्र टर्र करते मेंढक
लहराती पौधों का ये दृश्य है रोचक
सभी खुशियां लेकर मौसम मनभावन आए रे
मोहे भिंगाने अपने रंग में सावन आए रे
जिन तन को है न इनकी परख
क्या जलाए दिल में वो जोत की अलख
अमृत बनकर बुंद बुंद में चमन से जिवन आए रे
मोहे भिंगाने अपने रंग में सावन आए रे
देखो सुहानी मस्तानी रूत पावन आए रे
मोहे भिंगाने अपने रंग में सावन आए रे।
©anuragrahi