अपनी तो खैर करों क्या सोंचते हो जहान की,
सभी मुल्कों से बेहतर है हालात मेरे हिन्दुस्तान की।
तुम खाते हो यहां और अलापते राग खतरे में इस्लाम की,
सभी हैं महफूज़ यहां और न है खतरा कोई संविधान की।
तुम जो उन्हें हिमायत देने की बात करते हो,
वो जिन्से खतरा है सारे जग के इन्सान की।
क्यों दुविधा में पड़े हो प्यारे रास्ता तेरा खाली है,
दुम दबाओ जल्दी रूख करो अपने मुल्क पाकिस्तान की।
तेरे हाल पे हमे तरस आती है क्या बताऊँ,
जंग का तंज न कस होश ठिकाने लाओ इमरान की।
जैसे लुट ले कहार ही दुल्हन की कोई पालकी,
यही हालात है आज तेरे मुल्क पाकिस्तान की।
©anuragrahi
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