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धार-ए-दरिया से इसरार करते जाएंगे जब तलक़ न मिले ठहराव फकत बहते जाएगें ठिकाना…

धार-ए-दरिया से इसरार करते जाएंगे

जब तलक़ न मिले ठहराव फकत बहते जाएगें

ठिकाना जहाँ जहाँ है तेरा ऐ ग़म

हम हर उस गली झुग्गी में ठहरते जाएंगे