धार-ए-दरिया से इसरार करते जाएंगे
जब तलक़ न मिले ठहराव फकत बहते जाएगें
ठिकाना जहाँ जहाँ है तेरा ऐ ग़म
हम हर उस गली झुग्गी में ठहरते जाएंगेधार-ए-दरिया से इसरार करते जाएंगे
जब तलक़ न मिले ठहराव फकत बहते जाएगें
ठिकाना जहाँ जहाँ है तेरा ऐ ग़म
हम हर उस गली झुग्गी में ठहरते जाएंगे