पशु जैसे जीवन जी रहा,
प्रभु को भूल कर सो रहा,
किसी की ना मानी, शर्म ना आई,
धन के चक्कर में सारी जवानी गवाई,
रोती दुनिया, फिर भी हंस रहा,
इक आंसू भी ना आंखों से बह रहा,
हुई जीवन हानी, खता खाई,
धन के चक्कर में सारी जवानी गवाई,
सपूत कब बनेगा, कपूत क्यों हो रहा?
धन के लालच में रिश्तों को खो रहा,
सुविधा के लिए मचाने लगा दुहाई,
धन के चक्कर में सारी जवानी गवाई,
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©vicky
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