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'ध्यान'

सूरज निकलने से पहले जब आँखे ध्यान लगाती है,साँसो की आहट की पहचान मुझे कराती है......
अलग- अलग चिड़िया आकर अपनी आवाजो से मुझे अवगत कराती है, और मेरे ध्यान मे अपनी उपस्थिती दर्ज करवाती है......
हवाए आकर मेरी आँखों को मीठी नींद में सुलाने की कोशिशो में जूट जाती है, पर मेरी आँखें ध्यान को मजबूती से साँसो पर लगाती है........
जब आँखे अपना कार्य पूरा कर खुलती है तो खुद को चमकती दुनिया में पाती है.....
यह सफ़र इतना प्यारा है की मन की हलचल कुछ शांत-सी हो जाती है|
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