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दीवार बना बैठा हूँ।....

मैं दिल में कई सवालो के,
जवाब बना बैठा हूँ l
मैं रिशतो के बीच छोटी बड़ी,
दीवार बना बैठा हूँ।
पानी से भी हल्की है,
मेरी यकीन की दुनिया,
मैं अपनो के दरमियाँ,
शक का जंजाल बना बैठा हूँ।
मैं दोस्त हूँ, यकीं कर,
तेरी पीठ में छुरा ना घोपूगां,
तेरे चारों तरफ़ मैं दुश्मनी का,
जाल बना बैठा हूँ।
तेरे खेलो से वाकीफ हूँ,
तेरी बाजी से वाकीफ हूँ,
तेरे शतरंज की चालो में,
मैं खुद को आजमा बैठा हूँ।
ये सियासत है, इस सियासत के
रंग सबसे निराले हैं,
मैं दुनिया में चारो तरफ,
मजहबी इंसां बना बैठा हूँ।
तेरे इश्क से महंगा कुछ नहीं,
तोहफा इस दुनिया में,
मैं सब कुछ खोकर दुनिया में,
मिसाल बना बैठा हूँ।
हेमंत जोशी