Dil
जो दिल पे गुज़री है जानाँ तुम्हें बताएं क्या
ये दिल तो टूट गया हम भी टूट जाएं क्या
चराग़ होने की मिलती हैं ये सज़ाएं क्या
बुझा के मानेंगी हमको भी ये हवाएं क्या
तुम्हारे बाद सफ़र में कोई मज़ा न रहा
हर एक मोड़ पे सोचा के लौट जाएं क्या
हमारे चेहरे के दाग़ों पे तंज़ करते हो
हमारे पास भी है आईना दिखाएं क्या
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