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दिल

क्यों तोडते हैं दिल
कोई पूछे जरा
क्यों खेलते हैं जज्बातों से
कोई पूछे जरा
प्यार किया था
फिर धोखा दिया
कुछ तो वजह होगी
कहीं नाटक तो नहीं
कौन जाने...
कौन ढूंढता है वजह..अब
ढूंढ लेता है कोई और
जो जोड देता है दिल
आजकल दिल
बहुत जल्दी टूटता है
और फिर जुड भी जाता है
जज्बात प्रायोगिक हो ग्ए
कोई सपनों में नहीं ढूंढता राजकुमार
सामने दस में से शायद कोई मिले
न मिले तो भी चलता है
न वो समाज है न वैसी सोंच
स्वतंत्रता दिख रही हर ओर
ख्वाबों ख्यालों में अब नहीं जीते
जांच परख कर हर सौदा खरीदते
फिर भी नहीं जमती
तो कोई बात नहीं
छोड देते साथ जो
जन्मों का होता था कभी
ढूंढ लेते साथी मनमुताबिक
या फिर जी लेते अकेले मनमाफिक
©abhidilse