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दिल इक तेरी ख्वाहिश करता है,

बहुत से ख्वाब है यूँ तो मेरे,
फिर भी दिल इक तेरी ख्वाहिश करता है,
कोई नज़्म सी, कोई साज़ सा,
दिल मेरा छेड़ा करता है...
अनदेखा सा सपना बुना करती हूँ,
जाने क्या सोचा करती हूँ,
है नही हकीकत से कोई वास्ता,
अलग सी धुन में रहती हूँ..
कुछ अनकहे से अहसास है ये,
जिनकी तलब जाने कैसी लगी है,
माँगू ना उस रब से में कुछ,
फिर भी उम्मीद लगा रखी है...
क्यों हमेशा तुझे महसूस किया करती हूँ,
अजब सा कुछ ये खुमार है,
सज़दा करने को जी करता है,
शायद यही इश्क़ है या प्यार है...

©piku