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दिल की बात

प्यार से जिन्दगी बितानी हैं।
दिल से नफ़रत सभी हटानी हैं।
क़ल बुढापा उसें सतायेगा।
आज़ ज़िस पे ख़िली जवानी हैं।
ख़त्म करना हैं इस लडाई को।
दुश्मनी अब़ नही बढानी हैं।
आज़ भी टीसतीं ही रहती हैं।
चोट दिल की बडी पुरानी हैं।
हों गई बात वो इशारें मे।
ज़ो सभी के लिये अज़ानी हैं।
जिन्दगी को जियों ख़ुले दिल से।
मौत इक़ दिन सभीं की आनी हैं।
ब़ात विकास ने छिपाई जो दिल मे।
वो किसीं को नही ब़तानी हैं।
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©vikasgarg