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दिल ने जिसे दिल से सदा दी ।

दिल ने जिसे दिल से सदा दी
उसने ही प्यार की लौ बुझा दी।
हम तो बना रहे थे ख्वाबों में ताजमहल
उसने इमारत की दिवार गिरा दी।
मैने गुजरे कल को भुलना चाहां
उसने मेरे जख्मों को हवा दी।
मैं जिससे अब तक महफुज रहा
वहीं फुरकत की उसने सजा दी।
कभी तक्कलुफ में भी न मायुस हुआ मैं
अब उसने दर्द-ए-दिल बढा दी।
सच तो ये है कि अनुराग
मैंने खुद ही खुद को दगा दी।
©anuragrahi