हज़ारों ने कहाँ था
पर दिल ने न माना
उम्रभऱ का हैं ये जहऱ
मोहब्बत ना कर यारा।।
जब होहीं गई मोहब्बत आपसे
अब न दिन का ठिकाना हैं कोई
और नहीं हैं कोई रात का
हम तो लूट गए मोहब्बत में
जिससे आपको बड़ा सुकून मिला
हम तो ठग गए सुंदरता से आपके
अब करें भी तो किससे गिला
बरबाद हुई हैं हमारी खुशियाँ जबसे
तब से आपका चेहरा हैं खिला-खिला।।
यारों ने तो कहा हीं था
पर दिल ने हि न माना
अब समझ चूँके यह खेल सारा
ये मोहब्बत एक मीठा जहऱ हैं यारा।।
©nilesh2016
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