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दिल तोड़ दिया तुने न मेरा हाथ थामकर ।

दिल तोड़ दिया तुने न मेरा हाथ थामकर
ये खता की है तुने सब कुछ जानबुझकर।
मेरा ये मर्ज इश्क़ का लाइलाज हो चला अब
क्यूँ हो गई खफ़ा मुझे बिमार छोड़ कर।
तन्हा कौन जी सका है दुनिया में उम्र भर
मर जाऊँ!नहीं मर सकता तुझे तन्हा छोड़ कर।
पढना न फातिहा तु कब्र पर कभी मेरे लिए
हराम होगा वो अश्क जो गिराओगी मेरे नाम पर।
समंदर-ए-गम में डुबे को हो ख्वाहिश ही क्या
मिलेंगे पड़े हुए ये लाश किसी किनारे पर।
अफसोस जताना अनुराग मुनासिब न समझा
नाचते आए हैं किसी अपनों के ही इशारों पर।
©anuragrahi