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दिन के रंग तेरी तस्वीर संग

दिन के रंग तेरी तस्वीर संग
सुबह की गुलाबी धूप,
शबनम में भीगी हवा का हल्का नीला सा एहसास,
क्षितिज पर फैली बैंगनी लाली,
और शाम का नारंगी आसमान —

दिन की तेज़ पीली दोपहरी,
कभी सुनहरी किरनों का झरना,
कभी फ़िरोज़ी हवाओं की नरम सरगोशी,
कभी सब्ज़ वादियों की ठंडी राहत,
सब मिलकर जैसेवक़्त का एक हसीन रंगमंच सजा देते हैं।

कभी सुनहरी रोशनी तेरे चेहरे पर उतरती हैतो दिल में उजाला सा भर जाता है,
कभी आसमानी ख़ामोशी तेरी आँखों में घुलकररूह को गहरा सुकून दे जाती है।

और जब सुर्ख़ शामअपने दामन में दिन के आख़िरी रंग समेटती है,
तो उसमें जामुनी धुंध,केसरिया लम्हे,और नीली रात की आहट भी शामिल हो जाती है।

सुबह की गुलाबी लाली से लेकर
दोपहर की सुनहरी तपिश,
शाम की नारंगी ताबानीऔर रात की गहरी नीलिमा तक —

हर रंग, हर रौशनी, हर मंज़रजैसे क़ुदरत की मोहब्बत बनकरतेरी ही तस्वीर में उतर जाता हो।

-शिवन्या
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