दो मीठे शब्द बोल प्यारे
दुर्जन भी सज्जन होये
संत के संग पाप धोये
करे संगत दुर्जन की कुकर्म ही होये
फल ऐसा मिले आत्मा तडप के रोये
वाणी ऐसी बोल रोता हस्ते जाये
दो मीठे शब्द बोल प्यारे
दुर्जन भी सज्जन होये
रंग ऐसा ना कोई पाणी में ना मिल पाये
भगवान ऐसा रूप है किसीके समज ना आये
भज ले नाम प्रभू का जीवन सफल हो जाये
दो मीठे शब्द बोल प्यारे
दुर्जन भी सज्जन हो होये
गुरु बिना जीवन अधुरा
ओ अंधेरे में दीप जलाये
जीवन माया जाल
कोई समज ना पाये
दो मीठे शब्द बोल प्यारे
दुर्जन भी सज्जन हो होये
सुनिल घरडे
©sunilll
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