A

दोस्ती का किरदार

दोस्ती का कोई वसूल नहीं होता
इस किरदार की कोई पहचान नहीं होती
परछाईं की तरह जो उतर जाए हर राह में
जिसकी याद दिल के कोने में कहीं सिमट जाए
बन मार्गदर्शक जो सामने आए,
आत्मविश्वास जगाए जो प्रेरित कर जाए
खुद का स्वरूप मान जो सम्मान बढ़ाये
बिना शर्त के जो जिंदगी जीना सिखाए
अटूट गांठ जो किंचित खुल ना पाए
ऐसी डोर थाम लो तुम
दो मिशाल उस ऊंची उड़ान को
अगर वो पंछी रूपी काया है तो
तुम ही उसके पंख हो l
चाहे तो खंजर चला पंख काट
चाहे विष घोल पिला उठा दे दुनिया से
चाहे अंगारे फेंक दर्द की कराह दे
चाहे कर दे उसका जीवन व्यर्थ
आंख बन्द जो भरोसा करता है तुझपे
उस किरदार को बदनाम होने से बचा ले
उसकी मिशाल कही खो ना जाए
कहीं खो ना जाए .......
©anusingh