उठना गिरना चलना दोस्ती के संग।
रुलाकर बिखेरेंगे अप्रैल फूल के रंग।।
रंगों से सराबोर होता अपना मेल मिलाप।
नई ज़िल्द में लिपटे पुरानी यादों की किताब।।
किताब का हर पन्ना मौज मस्ती की कहे कहानी।
लिखा किस चेहरे को देख तेरे मुंह में था पानी।।
पानी जिस गम से आये वह गम भी हमें बताना।
काम होगा हमारा तुरंत उसे हरिद्वार पहुँचाना।।
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©vikasgarg
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