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दोस्तो मैं दिन को भी रात कहता हूं ।

दोस्तो मैं दिन को भी रात कहता हूं
हर जुदाई को भी मुलाकात कहता हूं।
मेरी गुजरी है अब तक जिस कदर जिंदगी
एक एक कर अहसासों से अपनी बात कहता हूं।
लोग बिछड़ते तो है,दिल और जुड़ जाता है
मैं उन हालातों का सही जज्बात कहता हूं।
मैं बारिश में सुखा रहा,आसुओं से भिग गया
किसी के लिए बहे अश्कों को ही बरसात कहता हूं।
सितमगर गर वो नहीं तो अमूमन मैं हि जालिम हूं
मैं अक्सर दिल के आवाजों को ही हजरात कहता हूं।
©anuragrahi