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दर्द

काफ़िर नहीं हूं जो सब छोड़ दूं,
आंखें बंद कर मुंह मोड़ दूं,
काश कि इस दिल को समझ पाता,
मगरुर ओर बेबसी के अंतर को जान पाता,
इन आंसुओं की कीमत समझ पाता,
तो दर्द क्या है ये जान पाता।।
©anvisha