दर्द छलक जाते हैं अक्सर
जबकि जख्मों को पीता हूं
हो जाते हैं हमसे रूखसत वो
जिनके हीं लिए मैं जीता हूं....
वो भी दे जाते गम की सदा
जिन्हें खुशियां सदा मैं देता हूं
ऐ जिंदगी तुझे न पाया समझ
कितनी भी मैं कोशिश करता हूं...
जो पास है होती आज मेरे
कल ख्वाबों में उसे पिरोता हूं
तुम क्या जानो दुनियावालों
कुछ राज सीने में छुपाए रखता हूं...
जी लेता हूं कुछ पल के लिए
बांकी तो हर पल हीं मरता हूं
सजती महफिल हो जाती भंग
अपनी किस्मत को रोता हूं...
है कमी नहीं धन दौलत की
फिर भी उसे पाने को तरसता हूं
जाऊंगा एक दिन दुनियां से
इस घुटन में घुट कर जीता हूं..
है तूने दी जिंदगी मुझको
तेरा शुक्रिया अदा करता हूं
बेहतर जीने की तमन्ना में
जो संग है उसको भुलाता हूं...
©abhidilse
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