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★ दर्द ★

खफ़ा हैं आज मगर ना उदासी चेहरे पर हैं,
साया हैं उठा और धूप काहीसे आई हैं।
ढुंढने निकले हैं मरहम जख्म के लिए, लेकिन
राह में कोई हाथों में नमक लिए खडे हैं।।
- Nilesh Ingole
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