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दर्द को मौत से पहले दफनाओं

दर्द को मौत के ,
पहले दफनाओं !
जज़्बात को ,
एहसास से समझाओं !
जिंदगी में ,
उमस बहुत है !
अब और ना इसे ,
अलाव से धाह लगाओं !
पिघल रहे हैं ,
एहसास जो जज़्बात के !
पलकों से लुढ़के ,
इससे पहले होंठों की जाम बनाओं !
शबनम जो ,
बरस रही है प्रेम से !
धरा की दूब की तरह ,
उससे भींग जाओं !
बन मोती वो चमकें ,
तुम भी हरे भरे हों जाओं !
सुनता कहां जज़्बात ,
कोई आवाज !
ऐ तो धुनता ,
रहता है एहसास !
महल बने ना बनें ,
शोहरत मिले ना मिले !
पर इतना तो करते जाओ ,
छांह मिले तुमसे औरों को !
बस किसी  नजर में ,
एक घर तो बनाओं !
दर्द को मौत के ,
पहले दफनाओं ।🤔
धन्यवाद 🙏
                _____संजय निराला ✍