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Droplets in अश्कs

अश्क एहतियात बरत रहा है
देर से ही सही पर अपनी कीमत‌ अब समझ रहा है।
अच्छा ही तो है ,शरीर‌ कुछ अधमरा सा था पहले
अब बूंद बूंद वाली कहावत को साबित कर रहा है।
अश्क‌ एहतियात बरत रहा है।
आखों से गिरकर खुदकुशी का दाग नहीं देना चाहता
ये अपनी कौम को
मौत के लक्षण तुम जिंदगी देने वाले ‌से
क्यो पूंछ रहे हो।
आवाज अभी भी बुलंद हैं इसकी,
ख़ामोश ‌होकर भी अपना काम कर रहा है,
अश्क एहतियात बरत रहा है।
सारी वासनाएं इसकी मर कर मोती संजोए हुई है,
बाहर न जाकर ये मेरे देश को मालामाल कर रहा है,
अर्थविहीन सरकार में ये संजीवनी भर रहा है,
अश्क एहतियात बरत रहा है।
देशद्रोही मन आखिरकार ‌हार गया मस्तिष्क ‌से
उसके समर्थन से अब सरकार का हौसला बढ़ रहा ‌है,
अनिश्चितताओं को फ़ैलाने वाला‌ अब डर रहा है,
अश्क एहतियात बरत रहा है।
माहौल न बने संवेदनाओं से भरे संक्रमण का
इसलिए युद्धस्तर पर काम चल‌ रहा है,
आज सक्षम है यह देश ,फ्रक नहीं पड़ता अब इसे
कैसा कल(past)रहा है.
अश्क एहतियात बरत रहा है।
©aaftab786