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दुनिया का दस्तूर यही

दुनियाँ का दस्तूर यही ,
उसको ही बचाएं ,
जिसका वजूद नहीं ,
पर श्रृष्टि कहां है मानती ,
उसको ही मिटाए ,
जिसका वजूद नहीं ,
ऐ भोले भाले सखा हमारे ,
कर ले मनन ,
कुछ गुन ले प्यारे ,
दुनियाँ है रे बड़ी बेदर्दी ,
काट पंख कहें उड़ ले प्यारे ,
पैरों को बेड़ियों में जकड़े ,
कहते फिरे काहे लगड़ाते प्यारे ,
कहते फिरे काहे लगड़ाते प्यारे ,
दुनियाँ का दस्तूर यही ,
हरदम सताती उसको ही ,
जिसका कोई कसूर नहीं ,
अपने बल का करें दिखावा ,
कमजोरों के सिवा ,
कहीं चलता ना चारा ,
झूठे रौब धौंस जमाते ,
हो जो बलिष्ठ सामने ,
दुम हिलाते स्वांग रचाते ,
दुनियाँ का दस्तूर यही ,
रंग बदलते गिरगिट सी ,
पहचान की पहचान रही ,
अरे मत पड़ इस झमेले में ,
दुनियाँ की बनाई मेले में ,
हैं सब कुछ नश्ववर ही यहां ,
छोड़ ऐ तीन अकेले को ,
आत्मा जागरूकता प्रेम ही ,
निर्विकार निराला बचता ,
बाकी सब बिक खप ही जाता ,
इस दुनियाँ की बनाई इस मेले में ,
दुनियाँ का दस्तूर यही ,
उसको ही बचाएं ,
जिसका वजूद नहीं ।🤔
धन्यवाद 🙏
____संजय निराला ✍