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" दूआ "🌹🌹🌹🌹

दूआ वो करते थे,
सफल हम होते थे।
घूप पास से निकलती थी,
छाँव छोड़कर जाती थी एसा कयु?
दूआ वो करते थे।
चट्टान से टकराता था जरूर,
चोट नहीं होती थी एसा कयु?
दूआ वो करते थे।
"संकेत " साहित्य यात्रा के सितारे,
चमक रहे थे शुक्र जैसे एसा कयु?
दूआ वो करते थे।
डाँ. माला चुडासमा "संकेत "
©dr.mala