A

दूर ना जाओ हमसे

सूख गई तरिंगणी अब
झुलस गए कानन सब
गली चौबारा अब ना बोल रही
अनन्त धरा सब डोल रही
डोर थाम लो कान्हा फिर से
दूर ना हो जाओ फिर हमसे
©anusingh